CM मोहन यादव पर कांग्रेस का बड़ा हमला, जमीन और कंपनियों को लेकर उठाए सवाल!

CM मोहन यादव से कांग्रेस ने मांगे जवाब, जमीन और कंपनियों को लेकर घिरी सरकार

मीडिया रिपोर्ट मे खुलासे के बाद मध्यप्रदेश की राजनीति में घमासान, कांग्रेस ने CM मोहन यादव से मांगे जवाब

भोपाल। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के 73वें बलिदान दिवस पर जहां भारतीय जनता पार्टी देश भर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर रही थी, वहीं दूसरी ओर मध्यप्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद चर्चा के केंद्र में आ गया। राष्ट्रीय समाचार पत्र द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट के बाद कांग्रेस ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके परिवार से जुड़ी कथित भूमि एवं कारोबारी हितों को लेकर भाजपा सरकार पर बड़ा राजनीतिक हमला बोला है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भोपाल में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्यमंत्री से कई सवाल पूछे। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में मुख्यमंत्री के परिवार और रिश्तेदारों से जुड़ी भूमि, विभिन्न कंपनियों में हिस्सेदारी तथा विकास परियोजनाओं के आसपास स्थित जमीनों के स्वामित्व का उल्लेख किया गया है।

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कांग्रेस नेताओं के अनुसार रिपोर्ट में मुख्यमंत्री के परिवार और रिश्तेदारों से जुड़ी कथित भूमि संपत्तियों तथा कुछ रियल एस्टेट कंपनियों का भी उल्लेख किया गया है। विपक्ष ने इन तथ्यों को सार्वजनिक करते हुए सरकार से पारदर्शिता और स्पष्टीकरण की मांग की है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उमंग सिंघार ने इंदौर-उज्जैन मार्ग सहित विभिन्न सड़क परियोजनाओं के संदर्भ में सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार स्पष्ट करे कि संबंधित क्षेत्रों में किन लोगों और कंपनियों ने जमीनें खरीदीं तथा इन कंपनियों का सत्ता से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध है या नहीं।

कांग्रेस का आरोप है कि इंदौर जैसे महत्वपूर्ण आर्थिक केंद्र का मास्टर प्लान लंबे समय तक लंबित रहने के पीछे भूमि से जुड़े हितों का टकराव हो सकता है। कांग्रेस ने पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा” वाले बयान का उल्लेख करते हुए भाजपा नेतृत्व से भी जवाब मांगा है। कांग्रेस का कहना है कि यदि आरोप निराधार हैं तो सरकार को तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं कि रिपोर्ट में सामने आई जानकारी आखिर सार्वजनिक डोमेन तक कैसे पहुंची। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार इस विषय से जुड़ी जानकारियां लंबे समय से विभिन्न स्तरों पर चर्चा में थीं और कई राजनीतिक व मीडिया हलकों तक पहुंच चुकी थीं। हालांकि इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित इस रिपोर्ट के बाद विपक्ष को भाजपा सरकार पर हमला बोलने का एक बड़ा अवसर मिला है। वहीं अब सभी की नजर मुख्यमंत्री कार्यालय और भाजपा की संभावित आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।

मध्यप्रदेश की राजनीति में यह मुद्दा आने वाले दिनों में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है। फिलहाल कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों पर संबंधित पक्ष का विस्तृत जवाब आना बाकी है, जिसके बाद इस पूरे विवाद पर तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

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