दल बदलने पर करुणा हो या विद्याचरण, जनता ने नहीं किया स्वीकार

रायपुर । प्रदेश में दल बदलकर लोकसभा चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को मतदाताओं ने कभी भी स्वीकार नहीं किया है। वे चाहे पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी करुणा शुक्ला रही हों या कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर के नेता विद्याचरण शुक्ला। पार्टी से निकलने के बाद लोकसभा का चुनाव लड़ने के बाद इन्हें मुंह की खानी पड़ी।
भाजपा और कांग्रेस ने दल बदलकर पार्टी में आने वाले नेताओं को लोकसभा चुनाव का प्रत्याशी बनाया है, लेकिन दोनों ही प्रत्याशियों को हार का स्वाद चखना पड़ा है। लोकसभा चुनाव-2024 में भाजपा ने सरगुजा संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस छोड़कर करीब चार महीने पहले पार्टी में शामिल हुए चिंतामणि महाराज को प्रत्याशी बनाया है।
दरअसल, विद्याचरण शुक्ल कांग्रेस के कद्दावर और राष्ट्रीय स्तर के नेता माने जाते थे। वर्ष-2000 में राज्य गठन के बाद वे मुख्यमंत्री के दावेदार थे। मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाने से नाराज होकर वे शरद पवार की पार्टी राकांपा में शामिल हो गए। फिर वर्ष-2004 में भाजपा में चले गए। भाजपा ने महासमुंद लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने का मौका दिया, लेकिन उन्हें अजीत जोगी से हार का सामना करना पड़ा। जोगी ने एक लाख 18 हजार 500 मतों से जीत हासिल की। ऐसे ही करुणा शुक्ला वर्ष-2004 में जांजगीर लोकसभा सीट से सांसद बनी थीं।
हालांकि, इसके अगले चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इन सबके बीच फरवरी-2014 में शुक्ला ने भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गई। कांग्रेस ने वर्ष-2014 के लोकसभा चुनाव में बिलासपुर से टिकट दी थी, लेकिन उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था। वे पूर्व मुख्यमंत्री डा रमन सिंह के खिलाफ भी राजनांदगांव विधानसभा से चुनाव लड़ी थीं। कोरोना काल में संक्रमण के दौरान उनकी मौत हो गई थी।
कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले चिंतामणी महाराज पर सभी की नजरें टिकी है। चिंतामणी महाराज की गिनती सरगुजा संभाग के वरिष्ठ नेताओं में होती है। वर्ष-2013 में चिंतामणी महाराज भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए थे। तब कांग्रेस ने सरगुजा जिले के लुंड्रा विधानसभा से प्रत्याशी बनाया था।
कांग्रेस ने फिर से भरोसा जताते हुए जगह बदलकर वर्ष-2018 में बलरामपुर जिले के सामरी विधानसभा से प्रत्याशी बनाया था। चिंतामणी महाराज दोनों बार कांग्रेस से विधायक निर्वाचित हुए थे। विधानसभा चुनाव-2023 में कांग्रेस ने चिंतामणी को टिकट नहीं दिया, जिससे वे नाराज होकर भाजपा का दामन थाम लिया। भाजपा में शामिल होने के दौरान उन्होंने कहा था कि उनकी घर वापसी हुई है।

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