



इंदौर। शहर के बीचों-बीच रंगपंचमी पर रंगों का उत्सवी उल्लास 30 मार्च को एक बार फिर नजर आएगा। रंगों का खेल यूं तो होलकर शासनकाल से राजवाड़ा पर खूब खेला जा रहा है, लेकिन मतवालों की टोली को संस्था के बैनर तले निकालने के सिलसिले को इस बार 75 साल पूरे हो रहे हैं। सबसे पहले शुरू हुई टोरी कार्नर की गेर रंगों के कड़वे से तो रसिया कार्नर की बैलगाड़ी पर बैठने की तनातनी से जन्मी। गेर को धर्म से जोड़ने के साथ पारीवारिक स्वरूप देने के साथ महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए राधाकृष्ण फाग यात्रा 26 वर्ष पहले शुरू की गई। इस बीच मालवा क्लब गेर निकलना बंद भी हुई।
एक समय शहर के नब्ज के रूप में टोरी कार्नर की खास पहचान थी। देश के बड़े राजनीतिक मुद्दे से लेकर शहर की कोई जानकारी हासिल करने का यह जागृत ठीया था। यहां आकाशवाणी पर समाचार सुनने के लिए लोग आते थे। टोरी कार्नर गेर के संयोजक शेखर गिरि बताते हैं कि बाबूलाल गिरि, छोटेलाल गिरि, रामचंद्र पहलवान ने रंगों से भरा कढ़ाव लगाना शुरू किया, जिसमें लोगों को डुबोया जाने लगा। इसके बाद लोग रंगभरी बाल्टियां लेकर राजवाड़ा पर इकट्ठा होने लगे। गेर का स्वरूप बनता गया। तब पेयजल की पाइप लाइन के पानी का प्रेशर इतना था कि बिना मोटर के ही पानी तीन मंजिल तक पहुंच जाता था। सबसे पुरानी गेर निकाली जानी लगी।
70 साल पहले संगम कार्नर की गेर शुरू हुई। इसमें नाथूलाल खंडेलवाल और कुछ साथी शामिल हुए। गेर में पहली बार हाथी, घोड़े और ऊंट देख लोग चौक गए। इसके बाद मिसाइलों के जरिये रंग-गुलाल उड़ाने का प्रयोग भी लोगों को खूब भाया। आयोजकों द्वारा गेर क्रम में बदलाव को लेकर राजनीतिक हस्तक्षेत्र के आरोप भी लगाए गए। संयोजक कमलेश खंडेलवाल बताते हैं कि बिना बाहरी सहयोग से गेर का आयोजन किया जाता है। इसमें अब प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल भी शुरू कर दिया।
एक समय ऐसा भी आया कि हुड़दंग के आरोपों के बीच लोग गेर में शामिल होने से किनारा करने लगे थे। ऐसे में नृसिंह बाजार से 26 साल पहले राधाकृष्ण फाग यात्रा स्व. लक्ष्मण सिंह गौड़ ने शुरू की। इसमें यात्रा का धार्मिक और शालीन स्वरूप देकर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना शुरू की गई। संयोजक एकलव्य सिंह गौड़ बताया कि एक बार फिर रंगपंचमी पर यात्रा अपने स्वरूप में निकलेगी। इस बार फिर परिवार के साथ शामिल महिला के लिए विशेष सुरक्षा घेरा चलेगा। इसके साथ खास बात अयोध्या में बना राम मंदिर की प्रतिकृति आकर्षण का केंद्र बनेगा।
रसिया कार्नर नवयुवक मित्र मंडल की 51 साल से निकली जा रही गेर की भी अपनी कहानी है। टोरी कार्नर और संगम कार्नर की गेर में रमेश जोशी और प्रेम शर्मा की बैलगाड़ी पर बैठने को लेकर कहासुनी हो गई। इससे रसिया कार्नर गेर का जन्म हुआ। गेर ओल्ड राजमोहल्ला से निकाली जाने लगी। सात साल पहले गेर में संयोजक पं. राजपाल जोशी के मित्र की बाइक से गिरने से दुर्घटना में मौत हो गई, तब से 500 युवा हेलमेट पहनकर शामिल हो रहे हैं ताकि लोगों को हेलमेट पहनने के लिए जागृत किया जाएगा। मारल क्लब की गेर भी 50 वर्ष से निकाली जा रही है। हुड़दंग की बात कहते हुए मालवा क्लब की गेर को निकालना रोक दिया।