उत्तर छत्तीसगढ़ में सामाजिक चेतना का अलख जगाने वाले संत गहिरा गुरु के सुपुत्र चिंतामणि महाराज सरगुजा लोकसभा सीट से भाजपा के प्रत्याशी घोषित कर दिए गए हैं। कांग्रेस से दो बार विधायक चुने जाने के बाद चार माह पूर्व उन्होंने कांग्रेस छोड़ भाजपा प्रवेश किया था।
भाजपा में इसी शर्त पर वे शामिल हुए थे कि लोकसभा में उन्हें टिकट दिया जाए। शर्त के अनुरूप भाजपा संगठन ने उन्हें सरगुजा लोकसभा क्षेत्र से प्रत्याशी घोषित कर दिया है।
कंवर समाज से आने वाले चिंतामणि महाराज वर्ष 2004 से 2008 तक भाजपा शासन काल में छत्तीसगढ़ संस्कृत बोर्ड के अध्यक्ष थे।
उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया था। 2008 में उन्होंने सामरी विधानसभा क्षेत्र से टिकट की मांग की थी, नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़े और 30 हजार मत भी प्राप्त किया था।
2011 में चिंतामणि महाराज कांग्रेस में शामिल हुए और उन्हें 2013 के विधानसभा चुनाव में लुंड्रा विधानसभा से चुनाव मैदान में उतार गया और उन्हें जीत मिली। वर्ष 2018 में उन्हें उनकी सीट बदलकर कांग्रेस ने सामरी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतारा।
यहां भी वह चुनाव जीत गए।लगातार दो बार कांग्रेस से विधायक चुने गए किंतु वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में सामरी से उनका टिकट जैसे कांग्रेस ने काटा वे नाराज होकर भाजपा में शामिल हो गए।
तब उन्होंने छत्तीसगढ़ के प्रभारी ओम माथुर से सरगुजा लोकसभा सीट से टिकट देने पर ही भाजपा में शामिल होने की शर्त रखी थी। इसी शर्त के अनुरूप चिंतामणि महाराज को ठीक चार महीने बाद सरगुजा लोकसभा सीट से प्रत्याशी घोषित कर भाजपा ने भी वादा निभा दिया है।
बता दें, सरगुजा लोकसभा क्षेत्र में गोंड़ जनजाति के मतदाताओं की संख्या सर्वाधिक है। दूसरे नंबर पर कंवर जनजाति के लोग आते हैं।
संत गहिरा गुरु आश्रम से बड़ी संख्या में न सिर्फ सरगुजा लोकसभा क्षेत्र बल्कि रायगढ़ और ओडिशा तक के लोग जुड़े हैं। इसका लाभ भी अन्य सीटों पर सीधे भाजपा को लोकसभा चुनाव में मिल सकता है।






